शनिवार, 9 जून 2012

ब्याह रचाने के लिये,,,,,


ब्याह रचाने के लिये,

एक लड़की मुझसे कुछ कहना चाहती है,

उसकी बातों से लगता है, वो मुझे चाहती है!


उसने कहा कि, मैंने तुमसे प्यार किया,

मैंने उससे कुछ इस तरह इन्कार किया!


न मेरे पास है गाड़ी तुम्हे घुमाने के लिये,

और न पैसे है, तुम्हे सैर कराने के लिये!


हँसता रहता हूँ लोंगो को हँसाने के लिये,

जोकर सा बन गया हूँ, जमाने के लिये!


इतना ही कहा कि, वह रोने लगी,

मेरी बात काटकर वो कहने लगी!


प्यार अपने लिये किया, न कि जमाने के लिये,

प्यार की समा जलाई थी नकि बुझाने के लिये!


संभालने को दी थी नईय्या, नकि डुबाने के लिये,

प्यार तो पवित्र गंगा है, जीवन में बहाने के लिये!


मैंने उसकी बात समझ कर काटते हुए कहा,

हँसते हँसते उसके दुःख को बाँटते हुए कहा!


मेरा कोई इरादा न था, तुम्हे रुलाने के लिये,

हम तो तैयार है,तुमसे ब्याह रचाने के लिये!

dheerendra,"dheer"

54 टिप्‍पणियां:

  1. वाह |||
    प्यार ने बोलती हि बंद कर दि...
    दिल को छु लेनेवाले भाव ....
    बहूत हि सुंदर शानदार रचना....

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  2. सुन्दर हल्की-फुल्की रचना

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  3. शाम के इस मौसम की तरह सुहानी सी कविता ...

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  5. बहुत खूब .... सुंदर पोस्ट .... बधाई

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  6. पूरी सिद्दत के साथ ,वर-श्रेष्ठ .....अनुकूल समय है

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  7. हंसी-हंसी में इत्ता कुछ हो गया।

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  8. प्यार तो पवित्र गंगा है, जीवन में बहाने के लिये....waah......

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  9. सर, इस उम्र में भी ..? कहीं कसक तो है। वाह, क्या प्रस्तुती है।......
    वैसे आपकी सक्रियता व निरंतरता की दाद दिए बिना नहीं रहूँगा।

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  10. :-)
    बात पुरानी है है..............एक कहानी है???????????

    सादर.

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  11. हम तो समझे थे
    अब तक कर चुके
    होंगे आप शादी
    अच्छा किया
    लिखी कविता
    पूरी बात बता दी ।

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  12. देर आयद दुरूस्त आयद
    चलो बात बन ही गयी ...

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  13. संभालने को दी थी नईय्या, नकि डुबाने के लिये,
    प्यार तो पवित्र गंगा है, जीवन में बहाने के लिये!

    क्या बात है. बहुत सुंदर रचना.

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  14. पहले इन्कार फिर सीधा ब्याह - वाह

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  15. इसमें कोई संदेह नहीं की इश्क प्यार औरमुहब्बत की बातें आपकी कलम (किबोर्ड) बेहतर रचती है, हो सकता है इसमें भी कोई राज छिपा हो जो भी हो हमें क्या ? आम खाने को मिल रहे हैं.पत्ते क्यों गिने ...? हा...हा....हा.................सुंदर प्रस्तुति..............

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  16. बढ़िया फार्मूला है ! मजेदार !

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  17. वाह वाह, बढिया अफ़साना है,प्यार यूं ही निभाना है।

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  18. मेरा कोई इरादा न था, तुम्हे रुलाने के लिये,

    हम तो तैयार है,तुमसे ब्याह रचाने के लिये!
    भैया भैया .कृपया यहाँ भी पधारें -
    भैया और नैया और खिवैया ,फिर काहे लिखे हो नैईययाram ram bhai

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  19. बढ़िया प्रेम गीत है भैया ,पार लगाओ नैया
    भैया .कृपया यहाँ भी पधारें -
    रविवार, 10 जून 2012
    टूटने की कगार पर पहुँच रहें हैं पृथ्वी के पर्यावरण औ र पारि तंत्र प्रणालियाँ Environment is at tipping point , warns UN report/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,NEW DELHI,JUNE 8 ,2012,१९
    http://veerubhai1947.blogs

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  20. आपका पहले वाला निर्णय ही ठीक था। शादी करने के लिए प्रेमिका भले प्यार की पींगे बढ़ाए,मगर शादी के बाद उसे गाड़ी,बंगला और पैसा ही चाहिए!

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  21. हा हा सही दास्ताँ है ... ऐसा ही होता है ...

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  22. धीरेन्द्र जी , ब्याह में जरुर बुलाना ! सुन्दर कविता

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  23. बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना ...

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  24. sir
    kya baat hai------bahut hi sundar pranay nivedan
    bahut hi achha laga---
    poonam

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  25. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (12-062012) को चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  26. अच्छी हास्य-रचना !

    ....मगर ऐसा मत करना |

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  27. *हम तो तैयार है,तुमसे ब्याह रचाने के लिये*

    अंत यही होना था तो रुलाये क्यों .... ? अजमाना जरुरी तो नहीं .... !!

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  28. वाह भई घीरेंद्र जी बल्‍ले बल्‍ले

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  29. भाई जी अब आपको क्या कहूँ
    माफ कीजियेगा जी
    मैंने तो सुना है

    शादी का विचार उठे मन माहि
    तो पन्द्रह, बीस, पच्चीस में कीजे
    हुए जब तीस, गए फिर खीझ
    चालीस में फिर नाम न लीजे
    पचास और साठ में मन ललचाए
    तो काढ़ के जूता कपाल पे दीजे

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  30. वाह प्रभु जी आनंद आ गया.... जय हो

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,