सोमवार, 15 अगस्त 2011

वाह गाँधी



















वाह गाँधी.........

वाह गांधी
पहन कर खादी
क्या चली तुम्हारे नाम की आंधी
आजादी के सपने दिखा कर
असयोग आंदोलन कराकर
सत्य और अहिंसा का पाठ पढाया
१५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजो से
हिन्दुस्तान आजाद कराया
बापू-?

यहीं पर हो गयी चूक
आपसे हो गयी नादानी
बेकार गयी
लक्ष्मीबाई, भगतसिंह,जैसे
अमर शहीदों की कुर्बानी
देश तो आजाद हो गया ,पर हमने-
और हमारे देश ने क्या पाया-?

पाया सिर्फ-
आतंक, गरीबी, अत्याचार,
महगांई, नेता, भ्रस्टाचार
इनके बारे में,
आपके क्या है विचार
अपने तीन बंदरों की तरह
आँख,कान,मुह,बंद किये
क्यों बैठे हो,
कुछ करते क्यों नहीं
कुछ बोलते क्यों नहीं
जरूर दाल में काला है,
लगता है परदे में
मुन्नाभाई से दोस्ती कर
अपने को भ्रस्टाचार के
दलदल में फसा डाला है
इसीलिये आप मौन है
जिंदगी भर संघर्स किया
एक लाठी और लगोट में,
तभी तो आजकल
बैठे दिखाई पड रहे हो
पांच सौ के नोट में...........

धीरेन्द्र भदौरिया,

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

अहसास.....




















अहसास.....



कौन है वो,जो हर वक्त मेरे पास है

जिंदगी के हर मोड पर मेरे साथ है ,

कभी गुमसुम बैठे अकेले देखता है जब मुझे

छेड़ जाता है चुपके से मन में कोई ख्याल वो,

उलझ के रह जाता है मन जब कभी ख्यालों में

धीरे से आकर कह जाता कानो में कुछ बात वो
,
कभी परेशान होकर नजरें ढूडती है जब उसे

हर पल उसका स्पर्श मह्सूस होता है मुझे,

क्यों तेरी बेचैन नजरे ढूडती है मुझे
-
मै तो तेरे पास हूँ, मै तेरे साथ हूँ ,

मै कोई गैर नहीं तेरा अहसास हूँ,.....



धीरेन्द्र भदौरिया,...














































शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

एक हमसफर चाहिए........
















एक हमसफर चाहिए.......


जीने के लिए एक जुनू चाहिए

कुछ करने जज्वा जिगर चाहिए

मंजिले मिलेगी मगर -

पाने के लिए एक डगर चाहिए ,


मुश्किलें तो जीवन में आती बहुत

प्रतिस्ठा,का चिन्ह न बनाये बहुत

परिस्थियां एक सी रहती नहीं-

संघर्स से कतराना नहीं चाहिए,


जीवन की राहों में बहुत मिलते है लोग

सच्चे साथी के लिए तरसते है लोग

साथी वही जो साथ दे -

परखने की एक नजर चाहिए,


जीवन साथी के बिना अधूरी है जिंदगी

जैसे ईश्वर के बिना अधूरी है बंदगी

साथ निभाने लिए हर मोड पर -

जिंदगी में एक हमसफर चाहिए.......


dheerendra