
वाह गाँधी.........
वाह गांधी
पहन कर खादी
क्या चली तुम्हारे नाम की आंधी
आजादी के सपने दिखा करबापू-?
यहीं पर हो गयी चूक
आपसे हो गयी नादानीऔर हमारे देश ने क्या पाया-?
पाया सिर्फ-
आतंक, गरीबी, अत्याचार,महगांई, नेता, भ्रस्टाचार
इनके बारे में,आपके क्या है विचार
आँख,कान,मुह,बंद किये
क्यों बैठे हो,कुछ करते क्यों नहीं
कुछ बोलते क्यों नहींलगता है परदे में
अपने को भ्रस्टाचार के
दलदल में फसा डाला हैतभी तो आजकल
बैठे दिखाई पड रहे होधीरेन्द्र भदौरिया,
