काव्यान्जलि
मंगलवार, 28 जून 2011
नजरिया
ये कैसा कलयुग है ,
चारो ओर धुंधला
दो काली रातो के बीच
एक दिन निकला
जब
की
ऐसी नहीं है कोई बात
दो दिनों के बीच
आती है एक काली रात
परिस्थित एक ही है
मगर
दोनों के नजरिये में
कितना फर्क है l
नई पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)