सोमवार, 7 नवंबर 2011

वजूद.....


जिन्दगी के
हर
जशन को अधूरा पाओगे
अगर बेटियों के आगमन से
इतना कतराओगे,
जीवन का ये अनमोल सुख
कैसे पाओगे,
काश-
तुम्हारे एक बेटी होती
प्यार से उसका नाम रखते ज्योति,
सहमी सहमी सिमटी सी
गुलाबी कपड़ों लिपटी सी
टुकुर टुकुर निहारती,
जैसे बेरहम दुनिया को देखना चाहती
उसका हंसना बोलना और मुस्कराना
तुम्हारा प्यार से माथे को सहलाना,
गाल चूमकर नाम से बुलाते-
गोद में उठाकर सीने से लगाते-
तो तुम्हरा दिल खुशियों से नाच उठता
कितनी ठंडक पडती कितना सकून मिलता,
नन्हे नन्हे पैरों से चलने की आहट
हंसना रोना और उसकी खिलखिलाहट,
गोद में उठाकर लोरी सुनना
उंगली पकडकर चलना सिखाना
तोतली जबान से कुछ कहने की चाहत
समाज के दोगली बातों से आहात
जैसे कहना चाह रही हो-?
बेटे और बेटी में इतना फर्क,
इसमें हम बेटियों का क्या कसूर
एक बार हमारे पंख लगाकर के देखो
खुले आसमान में उड़ाकर के देखो-
हम क्या नहीं कर सकती॥?
लक्ष्मीबाई, से लेकर मदरटेरसा, तक
इंदिरा गांधी,से लेकर कल्पना चावला तक
ये भी तो किसी की बेटियां थी,
बेटियां समाज की धडकन होती है
दो कुलों के बीच रिश्ता जोड़कर-
घर बसाती है
माँ बनकर इंसानी रिश्तों की,
भावनाओ से जुडना सिखाती है
पर तुमने-?
पर जमने से पहले ही काट डाला
शरीर में जान-?
पड़ने से पहले ही मार डाला,
आश्चर्य है.?
खुद को खुदा कहने लगे हो
प्रकृति और ईश्वर से
बड़ा समझने लगे हो
तुम्हारे पास नहीं है।
कोई हमसे बड़ा सबूत,
हम बेटियां न होती-?
न होता तुम्हारा वजूद......

०००००००००००००००००

dheerendra.....



48 टिप्‍पणियां:

  1. दिल के भावों को छू लेने वाली अभिवयक्ति | आपने मुझे मेरी बिटिया का बचपन याद दिला दिया |

    एक छोटी सी गुजारिश "आश्चर्य" को ठीक कर लें| कृपया अन्यथा न लें |

    टिप्स हिंदी में

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  2. आदरणीय धीरेन्द्र जी
    सस्नेहाभिवादन !

    भावना प्रधान रचना है आपकी …
    बेटियां समाज की धडकन होती हैं
    दो कुलों के बीच रिश्ता जोड़ कर
    घर बसाती हैं
    मां बनकर इंसानी रिश्तों की
    भावनाओ से जुडना सिखाती हैं

    बहुत सही कहा आपने …

    बेटियां ही हमारे अस्तित्व का कारण होती हैं ।

    # बेटियों के लिए मेरी कुछ पंक्तियां -

    भोली निश्छल प्यारी बेटी
    नन्ही राजदुलारी बेटी

    तुलसी कुंकुम रोली चंदन
    महकी-सी फुलवारी बेटी

    घर-आंगन की रौनक-ख़ुशबू
    तू केशर की क्यारी बेटी


    पूरी रचना के लिए पधारिए इस लिंक पर

    बेटी



    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  3. हम बेटियां न होती-?
    न होता तुम्हारा वजूद......

    बहुत सुन्दर भाव ...

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  4. आपने बहुत खूबसूरती से बेटी के महत्त्व को शब्दों में पिरोया है! आज भी हमारे देश में लोग बेटा चाहते हैं वंश को आगे बढ़ाने के लिए जब की आज के ज़माने में बेटी किसी भी कदम पर बेटा से कम नहीं है! क़ाश ये बात लोग समझ पाते ! दिल को छू गई हर एक पंक्तियाँ! इस उम्दा रचना के लिए बहुत बहुत बधाई!

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  5. खुद को खुदा कहने लगे हो
    प्रक्रति और ईश्वर से
    बड़ा समझने लगे हो
    तुम्हारे पास नहीं है।
    कोई हमसे बड़ा सबूत,
    हम बेटियां न होती-?
    न होता तुम्हारा वजूद...

    बहुुत ही संवेदनशील रचना । धन्यवाद ।

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  6. भावना प्रधान रचना
    beautiful

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  7. दिल को छू लेने वाली अभिवयक्ति

    blog par aakar apni pratikriya dene ke liye bahut bahut aabhaar

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  8. तुम्हारे पास नहीं है।
    कोई हमसे बड़ा सबूत,
    हम बेटियां न होती-?
    न होता तुम्हारा वजूद......

    बिलकुल सटीक पंक्तियाँ।

    सादर

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  9. daugthers are the symbol of goddess lakshmi....as our forefathers says but now a days....//
    good expession to ponder//

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  10. संवेदनशील ... बेटियाँ न होँ तो जीवन से प्रेम करुना और एहसास खत्म हो जाते हैं ... भाव मय कविता ...

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  11. एक बार हमारे पंख लगाकर के देखो खुले आसमान में उड़ाकर के देखो-
    हम क्या नहीं कर सकती

    बिल्कुल सही लिखा है सर,आज बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे हैं|बहुत पसंद आई यह रचना|

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  12. भावपूर्ण भावाभिव्यक्ति,बधाई !

    कृपया पधारें व अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराएँ !

    http://poetry-kavita.blogspot.com/2011/11/blog-post_06.html

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  13. बेटी के विषय में
    कहे गए सदविचार...
    बहुत उम्दा और प्रभावशाली प्रस्तुति

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  14. आदर्णीय धीरेन्द्र जी बहुत सुन्दर मन तो कहता है इस रचना को चुरा ले जाऊं http://ekprayasbetiyanbachaneka.blogspot.com/ बेटियाँ बचाने के एक प्रयास में मलकीत जी के ब्लॉग पर ....बहुत सुन्दर रचना ..
    मन खुश सोचने को मजबूर करती रचना
    आभार
    भ्रमर ५

    नन्हे नन्हे पैरों से चलने की आहट
    हंसना रोना और उसकी खिलखिलाहट,
    गोद में उठाकर लोरी सुनना
    उंगली पकडकर चलना सिखाना
    तोतली जबान से कुछ कहने की चाहत

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  15. bahut sundar bhaav achche shabdon ka mishran..bahut bhaai ye kavita.kaash sabhi ki bhaavnayen yesi hi hon.

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  16. बेटी की ब्यथा कथा और तथाकथित विकसित समाज की अविकसित मानसिकता का मर्मपूर्ण चित्रण ..

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  17. भावना प्रधान सुन्दर रचना ...

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  18. बहुत प्यारा चित्र .....हृदयस्पर्शी पंक्तियाँ ....

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  19. प्रक्रति को प्रकृति में दुरुस्त कर लें

    टिप्स हिद्नी में

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  20. बहुत सुन्दर संदेशप्रद रचना. बेटियों के बिना जीवन अधुरा है. बेटियां ख़त्म हो जाए तो दुनिया कैसे चले? दुनिया ka astitw ख़त्म हो jaayega. जानते मानते सभी हैं लेकिन फिर भी बेटी नहीं चाहिए. कहीं न कहीं इसके लिए हमरा समाज, परंपरा और मान्यताएं दोषी है. जाने कब लोग चेतेंगे. शुभकामनाएं.

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  21. दिल के भावों को छू लेने वाली अभिवयक्ति | ! बहुत सुन्दरता से सच्चाई को शब्दों में पिरोया है! शानदार प्रस्तुती!

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  22. वाह! बहुत सुन्दर भावभीनी प्रस्तुति है,धीरेन्द्र जी.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

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  23. हर जशन को अधूरा पाओगे
    अगर बेटियों के आगमन से
    इतना कतराओगे,
    जीवन का ये अनमोल सुख
    कैसे पाओगे

    hridaysparshi rachna..
    bitiya yaad aa gayi ...delhi me padh rahi hai.

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  24. आदरणीय अति उत्तम रचना खास कर
    काश-
    तुम्हारे एक बेटी होती प्यार से उसका नाम रखते ज्योति,
    सहमी सहमी सिमटी सी
    गुलाबी कपड़ों लिपटी सी टुकुर टुकुर निहारती,
    जैसे बेरहम दुनिया को देखना चाहती उसका हंसना बोलना और मुस्कराना तुम्हारा प्यार से माथे को सहलाना,
    गाल चूमकर नाम से बुलाते-गोद में उठाकर सीने से लगाते-
    तो तुम्हरा दिल खुशियों से नाच उठता कितनी ठंडक पडती कितना सकून मिलता,
    लाइने मन को छु जाती है
    आपके अनुभव का काफी लाभ हम बछो को भी मिल सकता है यदि आप" एक प्रयास बेटियां बचाने का " में अपनी रचनाये व् सुझाव आदि का सहयोग दे आपके मेल पे आमंत्रण भेजा जा चुका है स्वीकार करे

    उत्तर देंहटाएं
  25. बूत ही उच्च विचारों से ओत-प्रोत कविता...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  26. तुम्हारे पास नहीं है।
    कोई हमसे बड़ा सबूत,
    हम बेटियां न होती-?
    न होता तुम्हारा वजूद......

    कितना सही है पर जानते बूझते हमारे समाज के कुछ लोग इसे अनदेखा करते हैं । पुरुषी वर्चस्व हावी होना चाहता है और क्या ।

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  27. बहुत सुंदर भावभरी कविता !

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  28. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 11-11-2011 को शुक्रवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  29. धीरेन्द्र जी,आपने सही कहा,बेटियां हमारा वज़ूद हैं,जो अक्सर नकारा जाता है.भाव्पूर्ण रचना के लिये धन्यवाद.

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  30. हम बेटियां न होती-?
    न होता तुम्हारा वजूद.....
    अक्षरश: सही कहा है आपने ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  31. sir...aapne apne man ke saare rang is kaviya me daal kar kavita ko aur bhi khubsurat bana diya hai...
    bahut sundar badhai swikar karen...

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  32. हर जशन को अधूरा पाओगे
    अगर बेटियों के आगमन से इतना कतराओगे.....

    सही कहा आपने बेटियों के बिना ये जग अधुरा है ....

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  33. हम बेटियां न होती-?

    न होता तुम्हारा वजूद......
    ekdam theek......

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  34. बहुत ही उम्दा रचना....
    सादर बधाई...

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  35. jaise phool ke bina bgica suna hota hai vaise hi beti ke bina ghar suna hota hai.good abhivyakti.thanks.

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  36. दिल को छू लेने वाली अभिवयक्ति
    सार्थक सन्देश देती अच्छी रचना........!

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    पर आपका स्वागत है
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  37. धीरेन्द्र जी नमस्कार, मन को छूने वाली रचना । मेरे ब्लाग पर भी आपका स्वागत है।

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  38. धीरेन्द्र जी,
    नमस्कार,
    आप आई-मैजिक बैकग्राउंड प्रयोग करने के लिए क्या आप भी अपनी पोस्ट "EDIT HTML" मोड में लिखते हैं यदि नहीं तो इस लेख को जरूर पढ़ें | इस पोस्ट को पढ़ने का कष्ट करें | आपके समस्या का समाधान हो जायेगा | फिर भी किसी प्रकार की मुश्किल पेश आए तो आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं |

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  39. बेटियां न होती-?
    न होता तुम्हारा वजूद......
    bahut sundar satya

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,