अपनी राम कहानी में
टूटे फूटे कुछ अक्षर है, अपनी राम कहानी में,
जलते प्रश्नों के उत्तर है, अपनी राम कहानी में i
प्यासे पनघट,तृप्त मरुस्थल, हँसते घावों के मेले,
ऐसे ही कुछ हस्ताक्षर है, अपनी राम कहानी में i
आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती है,
पीड़ाओं के गूँगे स्वर है, अपनी राम कहानी में i
साँझ ढले धीर को अक्सर,आकर घेर लिया करते,
ये जो यादों के लश्कर है, अपनी राम कहानी में i
