18/5/2013/को मेरी बेटी दीप्ती संग कृष्ण कुमार सिंह का विवाह संपन्न हुआ,
बेटियाँ
ओस की एक बूँद सी होती हैं बेटियाँ
स्पर्स खुरदुरा हो तो रोती हैं बेटियाँ,
रोशन करेगा बेटा बस एक ही कुल को
दो-दो कुलों की शान बढाती है बेटियाँ,
कोई नहीं है दोस्तों एक दूसरे से कम
हीरा है अगर बेटा तो मोती हैं बेटियाँ,
काँटों की राह पर खुद चलती ही रहेगीं
औरों के लिए फूल बनती हैं बेटियाँ,
विधि का विधान, यही दुनिया की रस्म है
अपनों को छोड़ पिया के घर जाती है बेटियाँ,
नोट - उक्त रचना मुझे शादी के कार्ड में पढने को मिली,जिसे मै आपके साथ साझा कर रहा हूँ,यदि किसी को इस रचना के रचनाकार का नाम मालुम हो बताने का कष्ट करें,,,,,,,,dheerendra singh bhadauriya