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रविवार, 20 अक्टूबर 2013

हमने कितना प्यार किया था.

हमने कितना प्यार किया था.
 

   अर्ध्द- रात्रि  में  तुम  थीं  मैं  था, मदमाता  तेरा  यौवन  था ,  
  चिर - भूखे  भुजपाशो  में  बंध, अधरों का रसपान किया था ! 

हमने कितना प्यार किया था !!

 ध्येय  प्रणय-संसर्ग  मेरा था, हृदय तुम्हारा कुछ सकुचा था ,
 फिर भी कर स्वीकार इसे तुम,तन मन मुझपे वार दिया था !

हमने कितना प्यार किया था !!

थकित  बदन  चुपचाप पड़े थे ,मरू-थल  में  बरसे  सावन थे ,
 हम  दोनो  ने  एक  दूजे  को , प्यारा  सा  उपहार  दिया  था ! 
 
हमने कितना प्यार किया था  !! 

रचनाकार - विक्रम सिंह, केशवाही,शहडोल,