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सोमवार, 17 जून 2013

तड़प,

तड़प

 बिखरते   ख़्वाबों   को  देखा
 सिसकते  जज्बातों को देखा
   रूठती   हुई   खुशियाँ   देखी, 

    बंद   पलकों   से , टूटते   अरमानो   को   देखा...

अपनों  का  बेगानापन देखा
परायों  का अपनापन  देखा
 रिश्तों   की   उलझने   देखी,

    रुकती  साँसों ने, जिन्दगी को  मुस्कराते  देखा...

 तड़प   को    भी    तडपते    देखा
 नफरत को प्यार में बदलते देखा
     आंसुओं      में     खुशियाँ    देखी,    

 रिश्तों  में , कितनो  को  मिलते  बिछड़ते  देखा...

 नाकामियों    का     मंजर   देखा 
डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
  वजूद    की    जद्दोजहद     देखी,  

जिन्दगी ने, हजारों  ख्वाहिशों को  मरते  देखा
...


मंगलवार, 27 नवंबर 2012

तड़प,,,

तड़प

जिन्दगी आज कैसी बदहवास सी दिखती है,
तन्हाई  में भी तू  ही तू आस पास दिखती है!

दरिया  में  रह कर भी  मै  प्यासा  रह  गया,
मेरी निगाहों में सदियों की प्यास दिखती है!

तेरी यादें आ के  तडपाती तो मयखाने जाता,
मेरी  तबाही  भी  अब  देवदास सी दिखती है!

होठों  पे  शोले  रख कर  कब  तक मुस्कराऊं,
मेरा जिस्म तो अब ज़िंदा लाश सी दिखती है!

दर्द  दिल  में  दफ़न  कर अश्रु  का  आचमन  कर लिया,

मकसद  न रहा जीने का ,जिन्दगी बेजार सी दिखती है!

dheerendra bhadauriya,,,