तड़प
बिखरते ख़्वाबों को देखा
सिसकते जज्बातों को देखा
रूठती हुई खुशियाँ देखी,
बंद पलकों से , टूटते अरमानो को देखा...
अपनों का बेगानापन देखा
परायों का अपनापन देखा
रिश्तों की उलझने देखी,
रुकती साँसों ने, जिन्दगी को मुस्कराते देखा...
तड़प को भी तडपते देखा
नफरत को प्यार में बदलते देखा
आंसुओं में खुशियाँ देखी,
रिश्तों में , कितनो को मिलते बिछड़ते देखा...
नाकामियों का मंजर देखा
डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
वजूद की जद्दोजहद देखी,
जिन्दगी ने, हजारों ख्वाहिशों को मरते देखा...

