मेरी बेटी दीप्ती, जिसका विवाह 18/5/2013/संपन्न हुआ
ओ प्यारी लली,
बड़े नेहों से सींचा फूलों सी पली
बड़े नेहों से सींचा फूलों सी पली
छोड़ बाबुल का घर ससुराल चली,
तुझको ससुराल में प्यार ऐसा मिले
याद आए न कभी बाबुल की गली,
मेरी लाडो रहे खुश ये दुआ है मेरी
बन के रहना हमेशा मिश्री की डली,
सबके दिल में तू बसना खुशबू की तरह
लगे सबको तू अपनी बगिया की कली,
लाज रखना सदा अपने माँ -बाप की
नाम हमारा बढ़ाना ओ प्यारी लली,
तुझको ससुराल में प्यार ऐसा मिले
याद आए न कभी बाबुल की गली,
मेरी लाडो रहे खुश ये दुआ है मेरी
बन के रहना हमेशा मिश्री की डली,
सबके दिल में तू बसना खुशबू की तरह
लगे सबको तू अपनी बगिया की कली,
लाज रखना सदा अपने माँ -बाप की
नाम हमारा बढ़ाना ओ प्यारी लली,
dheerendra singh bhadauriya,