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गुरुवार, 26 जुलाई 2012

इन्तजार,,,

इन्तजार,,,

शाम ढलने तक, मैंने इन्तजार किया,
वर्ष बदलने तक मैंने इन्तजार किया !

मेरे लफ्ज तुमसे, कुछ कहना चाहते थे,
तेरे गुनगुनाने तक मैंने इन्तजार किया !

बेवफाई बह रही थी, मेरे अश्क-ऐ-समंदर में,
फिर भी मयखाने तक मैंने इन्तजार किया !

करवटे बदलता रहा, रात भर आहों में,
नींद के आने तक मैंने इन्तजार किया !

नम हो गया था, तकिया दोनों तरफ से,
सूरज के निकलने तक मैंने इन्तजार किया !

दिन निकला नही, पर साल बदल गया,
तेरे जाग जाने तक मैंने इन्तजार किया !

साल बदलने से, तेरी बेवफाई नही बदली,
तेरी नजरें बदलने तक मैंने प्यार किया !

dheerendra bhadauriya,