"सवैया छंद"
फूल बिछा न सको
फूल बिछा न सको
1
पथ में यदि फूल बिछा न सको,तुम कंटक जाल बिछाव नही |
यदि नेह नहीं दिखला सकते , कटु बैन सुना दुतराव नही |
तुम राह सही बतला न सको, भटके मन को भटकाव नही |
मृदुहास न बाँट सको यदि तो , हँसते मन को भरमाव नही |
2
मिलता सबको नहि जीवन ये,हर आस-प्रदीप कहाँ जलता |
कब जीवन की हर चाह फली, हर प्रेम - प्रसून कहाँ खिलता |
मन माफिक प्रीत कहाँ मिलती,मन का हर घाव कहाँ भरता |
पथ में यदि फूल बिछा न सको,तुम कंटक जाल बिछाव नही |
यदि नेह नहीं दिखला सकते , कटु बैन सुना दुतराव नही |
तुम राह सही बतला न सको, भटके मन को भटकाव नही |
मृदुहास न बाँट सको यदि तो , हँसते मन को भरमाव नही |
2
मिलता सबको नहि जीवन ये,हर आस-प्रदीप कहाँ जलता |
कब जीवन की हर चाह फली, हर प्रेम - प्रसून कहाँ खिलता |
मन माफिक प्रीत कहाँ मिलती,मन का हर घाव कहाँ भरता |
प्रिय ! हो न निराश कभी जग में,मन चैन सदैव कहाँ मिलता |
