शनिवार, 25 अगस्त 2012

जख्म,,,


जख्म

जब तेरी याद आई आँखों में आँसू आ गये,
तुम्हारी खातिर हँसते-हँसते जख्म खा गये!

न दिन को चैन रहा न रात को नीद आई,
जिसके लिए जंग छेडा वो गैरों को भा गई!

एक इन्तजार था कि कभी तुझे घर लायेगें,
कल्पना न की थी कभी ऐसा जख्म पायेगें!

बेवफा, देखना एक दिन हम जरूर याद आयेगें,
ये झूठ,फरेब,के आँसू हम छुपा के मुस्कुरायेगें!

dheerendra bhadauriya,,,

55 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे फख्र है मोहब्बत पे अपनी है एतबार भी ,तुझे याद बनके सतायेंगे ...बढ़िया प्रस्तुति है भाई साहब .बधाई ..कृपया यहाँ भी पधारें -
    शनिवार, 25 अगस्त 2012
    आखिरकार सियाटिका से भी राहत मिल जाती है .घबराइये नहीं .
    गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)एक सम्पूर्ण आलेख अब हिंदी में भी परिवर्धित रूप लिए .....http://veerubhai1947.blogspot.com/2012/08/blog-post_25.html

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  2. दया याद में हैं नहीं, करूँ नहीं फ़रियाद |
    वादा का दावा किया, छोड़ वाद परिवाद |
    छोड़ वाद परिवाद , सही निष्ठुरता तेरी |
    दूँ जख्मों को दाद, रात यह सर्द घनेरी |
    रविकर जागा खूब, दर्द के गजब स्वाद में |
    रहा नहीं अब ऊब, भेज मत दया याद में ||

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  3. बहुत उम्दा,

    दर्द बयां करती post

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  4. बेवफा,देखना एक दिन हम जरूर याद(तडपायेगें)आयेगें,
    ये झूठ-फरेब के आँसू ,हम छुपा(भुला)के मुस्कुरायेगें!

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  5. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  6. एक इन्तजार था कि कभी तुझे घर लायेगें,
    कल्पना न की थी कभी ऐसा जख्म पायेगें!... बेहतरीन

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  7. एक इन्तजार था कि कभी तुझे घर लायेगें,
    कल्पना न की थी कभी ऐसा जख्म पायेगें!
    ...........waah bahut sundar dheerendra ji bahut khub

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  8. बेहतरीन अभिव्यक्ति...
    बेवफा को भूल जाने में ही है भलाई...
    जब जब उसकी याद आती है
    दिल को बड़ा तडपाती है...
    :-)

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  9. बेहद सुन्दर ग़ज़ल , क्या बात है सर .

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  10. सबके सामने तो मुस्कराना ही होगा..

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  11. वाह बहुत खुबसूरत।

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (26-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  13. आपकी किसी पुरानी बेहतरीन प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार २८/८/१२ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी मंगल वार को चर्चा मंच पर जरूर आइयेगा |धन्यवाद

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति .
    एक इन्तजार था कि कभी तुझे घर लायेगें,
    कल्पना न की थी कभी ऐसा जख्म पायेगें!
    ..वाह

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  15. एक इन्तजार था कि कभी तुझे घर लायेगें,
    कल्पना न की थी कभी ऐसा जख्म पायेगें
    sundar bhav ....

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  16. धीरेंद्र जी,
    आप इतना सुंदर लिखते हैं, जिसके लिए मेरे पास कोई विशेषण नही है। आप मेरे पोस्ट पर आकर मुझे अहर्निश प्रोत्साहित करते हैं, इसके लिए मैं आपको तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं । धन्यवाद।

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  17. बेहेतेरीन प्रस्तुति.....

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  18. मनोभावों की सुंदर अभिव्यक्ति।

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  19. भावनाओं को अच्छे और भावपूर्ण शब्द दिए हैं आपने!!

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  20. बहुत खूब,,,बस पढ़ते गए,,और डूबते चले गए ,यादों के नदी में...|

    recent post-"ऐसे भी होते हैं |

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  21. बेवफाओं को यूं याद क्यों करते हैं ...
    कुछ तो रिश्ता होगा जो इतनी याद है ... भावनाओं का तूफ़ान लिखा है ...

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  22. बहुत ही संवेदनशील प्रस्तुति है सर ,बहुत बढ़िया । "साथी " ब्लॉग पर आपका स्वागत है ,ज्वाइन अस ।

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  23. जब तेरी याद आई आँखों में आँसू आ गये,
    तुम्हारी खातिर हँसते-हँसते जख्म खा गये!
    bahut khoob waah

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  24. न दिन को चैन रहा न रात को नीद आई,
    जिसके लिए जंग छेडा वो गैरों को भा गई!

    बहुत सुन्दर भाव लिए बेहतरीन रचना,


    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

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  25. बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई

    इंडिया दर्पण
    पर भी पधारेँ।

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  26. बहुत सुन्दर भावमयी रचना..

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  27. बहुत खूब ... भावमयी रचना..बधाई....

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  28. सुंदर रचना..ये आपकी विशेषता है कि चंद पंक्तियों में ही गहरी बात कह जाते हैं।

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  29. Jisane aapko bhula diya use kya yasd rakhna.

    Achchi prastuti.

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  30. तुम्हारी खातिर हँसते-हँसते जख्म खा गये!

    Waah! itna sab kuchh saste hate hain, fir bhi nahin kuchh kahye hain. Yh ek pakshiy pyaar bhi kabhi-kabhi ajeeb rang lata hai .... tarah ke gul khilata hai. sahta hai sab kuchh lekin fir usko 'bewafa' nahin kah pata. yahi to pyaar aur chaahat ki para kaashthaa hai ....

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  31. बेवफा, देखना एक दिन हम जरूर याद आयेगें,
    ये झूठ,फरेब,के आँसू हम छुपा के मुस्कुरायेगें!

    बहुत सुन्दर रचना ...दिल है की मानता नहीं ..

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  32. शीशे के उस पार तुम, हम बैठे इस पार
    तस्वीरों में क़ैद तुम , बाहर हम लाचार
    बाहर हम लाचार , जख्म हैं बहुत पुराने
    अब भी गाते यार,तलत सहगल के गाने
    दिल का गेहूँ डाल, आज भी चक्की पीसे
    हर टुकड़े में आप , तोड़ कर देखे शीशे ||


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  33. मन के प्रबल उदगार ...हृदयस्पर्शी सुन्दर प्रस्तुति

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  34. संवेदना और भावों से पूर्ण अभिव्यक्ति.

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  35. बेवफा, देखना एक दिन हम जरूर याद आयेगें,
    ये झूठ,फरेब,के आँसू हम छुपा के मुस्कुरायेगें!... वाह, बहुत खूब लिखा है धीरेंदर जी!

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,