रविवार, 18 अगस्त 2013

सुलझाया नही जाता.

सुलझाया नही जाता.
तुमसे  बढ़कर  दयालु  कोई  पाया  नही  जाता
 तुम्हारी शरण में आकर कहीं जाया नही जाता,

पाप  की गठरी  हमारी  बहुत  भारी हुई  प्रभु जी
 सिर  पर  उठाकर  उसे  यहाँ  लाया  नही  जाता, 

 बुलावे  पर  तुम्हारे   ही  हुए  दरबार  में  हाजिर 
 बुलाते तुम नही  तब तक  यहाँ आया नही जाता,

 डराता  है  हमे  अक्सर ,तुम्हारी  कृपा  है  वरना 
  हमारी  जिन्दगी से  मौत  का  साया  नही जाता, 

तुम्हारा  नाम  जपते  है  तुम्हारा  नाम  गाते  है
 तुम्हारे  नाम  के  सिवा  हमसे  गाया  नही जाता,

करो  अब तो कृपा  प्रभुजी, हमारा जीव माया में
  उलझने बढ रहीं है धीर कि सुलझाया नही जाता, 

52 टिप्‍पणियां:

  1. करो अब तो कृपा प्रभुजी, हमारा जीव माया में
    उलझने बढ रहीं है धीर कि सुलझाया नही जाता,
    बेहतरीन !

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  2. वाह बहुत शानदार, गजल के माध्यम से सशक्त बात कही है.

    रामराम.

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  3. लाजबाब अभिव्यक्ति
    बहुत ही खूबसूरत रचना
    सादर

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  4. waaaaah waaaaaah kya khu sir.......umda...slam aapko.bahut hi sandar hai...waaaaaaaaah

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  5. पाप की गठरी हमारी बहुत भारी हुई प्रभु जी
    सिर पर उठाकर उसे यहाँ लाया नही जाता,
    बहुत खूबसूरत.......

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  6. बेहतरीन भावों की कड़ियाँ

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  7. भक्तिभाव से ओतप्रोत बहुत सुन्दर ग़ज़ल
    atest post नए मेहमान

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (19-08-2013) बहन की गुज़ारिश : चर्चामंच1342 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. बहुत शानदार , बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

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  10. ज़िंदगी के धागे बिना उलझे रहते नहीं ... जितना सुलझाने की कोशिश करो और उलझते जाते हैं ... खूबसूरत गज़ल

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  11. बुलावे पर तुम्हारे ही हुए दरबार में हाजिर
    बुलाते तुम नही तब तक यहाँ आया नही जाता......bahut sahi kaha
    bahut achhi rachna

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  13. भक्ति भाव लिए बहुत शानदार गजल..आभार

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  14. तुम्हारा नाम जपते है तुम्हारा नाम गाते है
    तुम्हारे नाम के सिवा हमसे रहा नही जाता,
    बहुत सुन्दर !

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  15. तुमसे बढ़कर दयालु कोई पाया नही जाता
    तुम्हारी शरण आकर कहीं जाया नही जाता,

    बहुत ही सुन्दर तुझ बिन कहीं ठौर नहीं

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  16. बहुत ही सुंदर सार्थक और बेहतरीन प्रस्तुती, आभार।

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  17. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (20 -08-2013) के चर्चा मंच -1343 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  18. waah dil ke bhawon ko bkhubi ukera hai kagaj ke pannon par .....

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  19. बहुत ही सुंदर सार्थक प्रस्तुती, आभार।

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  20. डराता है हमे अक्सर ,तुम्हारी कृपा है वरना
    हमारी जिन्दगी से मौत का साया नही जाता,
    बेहतरीन प्रस्तुति .
    (http://dehatrkj.blogspot.com)

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  21. आज की बुलेटिन विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस .... 601 वीं ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट (रचना) को भी शामिल किया गया। सादर .... आभार।।

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  22. बेहतरीन रचना है ... सत्य के करीब, जीवन दर्शन से भरपूर ....

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  23. एक उसी का आश्रय है अंत में और कुछ काम नहीं आता...

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  24. संवेदनशील रचना ,बहुत ही भावपूर्ण ओर सुन्दर,बधाई ओर शुभकामनायें ...

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  25. प्रवाह-पूर्ण, प्रशंसनीय, प्रभाव-पूर्ण, प्रस्तुति ।

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  26. क्या बात है भाई, बड़ी उम्दा हुई रचना-
    पढ़कर इसे सचमुच कहीं जाया नहीं जाता -

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  27. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना ...

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  28. जीवन दर्शन से भरपूर भावपूर्ण रचना ....बधाई...

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  29. बहुत ही लाजबाब होते है आप के नुस्के | समय की आभाव की वजह से बार - बार आपके पोस्ट पर आया नहीं जाता | क्षमा करेंगे धीरेन्द्र जी |

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  30. डराता है हमे अक्सर ,तुम्हारी कृपा है वरना
    हमारी जिन्दगी से मौत का साया नही जाता..जीवन का बहुत बड़ा सच आपने अपने शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया ..सादर बधाई के साथ

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  31. प्रभु के नाम
    बेहतरीन प्रस्तुति :)

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  32. करो अब तो कृपा प्रभुजी, हमारा जीव माया में
    उलझने बढ रहीं है धीर कि सुलझाया नही जाता,
    wah sir bahut sundar

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  33. संवेदनशील,बहुत ही भावपूर्ण ओर सुन्दर,बधाई ओर शुभकामनायें ...

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,